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Friday, December 26, 2008

बस एक न्यू इयर चाहिए हैप्पी होने के लिए

ग्रेगरियन कैलेंडर के मुताबिक साल २००८ अब से चंद दिनों के बाद अलविदा कहने वाला है और तमाम देशवासी इसे पूरे हर्षौल्लास से मनायेगे....चाहे २६/११ की स्मृतियाँ अभी धुंधली नही हुई हो....हो भी नही सकती ....सियासत के हलकों में पाकिस्तान के साथ जंग छिड़ने के कयास लगाये जा रहे हैं...दोनों ही देशों के रक्षा अधिकारी सामरिक शक्ति की नाप-तोल कर रहे हैं....इसके उलट आमिर खान ने 'रब ने बना दी जोड़ी ' को 'गजिनी' से टक्कर दी है...मीडिया इसे किंग खान बनाम मिस्टर परफेक्शनिस्ट के रूप में भुना रहा है.....३१ की सर्द रात को कई लोग नए साल के इंतज़ार में जागेंगे....और कई लोग ऐसे भी होंगे की वो इसलिए नही सो सकते की उनके पास रैन-बसेरे नही हैं...सर छुपाने की जगह है....तो कपकंपाती सर्दी को मात देने के लिए पर्याप्त रूप से गर्म कपड़े नही हैं। जिनको नए साल का इंतज़ार है....वो १ तारीख को नए संकल्पों/ रेसोलुशन करते हुए पुराने ढर्रे पर लौट आयेंगे और जिनके लिए सभी दिन एक सामान है, जिनमें तथाकथित बुद्धिजीवी भी होंगे....वो इसे सांस्कृतिक उद्योग का स्टंट मानकर गरियांगे और गरीबों की वही आवाज़ होगी ...जो यह कहेगी....ये सब अमीरों के चोंचले हैं.....हमें तो वही दाल-रोटी खानी है।
खैर तमाम विडंबनाओं के बावजूद नयापन सभी को अच्छा लगता है.....प्रकृति का श्रृंगार न कर सकेंगे बासी फूल की बतर्ज़ कम से कम १ दिन तो लोग नए साल का खैर कदम करते हुए इसी बहाने मुस्कुराएंगे...बस एक सबब चाहिए खुश होने के लिए...चलिए नया साल ही सही!

2008 is going 2 finish

Now, we need to face 2009

There may be risks involved

We may need to face roadblocks

So stay alert


Share time with friends

Jump over obstacles

With care And caution

Face challenges

Remember to laugh

Cooperate

Discover

Make new friends
Above all...be ready for adventure
Stick together
And you will be able to go far

Very far.....

Well, not quite that far....

Always take time to smell the flowers
Don't forget to relax and enjoy

And dont forget those who likes u very much.
Advance New Year-2009 wishes

Thursday, December 25, 2008

कृष्ण का प्रतिबिम्ब क्राईस्ट

कृष्ण और येशु दोनों अवतारी पुरषों के जीवन में अद्भुत समानता मिलती है....कृष्ण का जन्म जहाँ कारागार में होता है...वहीं येशु जेरुशलम के एक अस्तबल में पैदा होते है....कृष्ण अगर गोपालक हैं जीसस को गड़रियों का ईश्वर कहा गया। वासुदेव पुत्र कृष्ण को देवकी के वातसल्य से उतना याद नही किया जाता जितना यशोदा के आँचल में खेलने वाले बालक के रूप में बाललीला याद की जाती है. akaran ही सूरदास ने द्वारकापति से अधिक नंदलाल को महत्व नही दिया है।
येशु के बारे में भी प्रचलित है कि वो ईश्वर का बेटा है और पैगम्बर है और मरियम से उसका सम्बन्ध यशोदा-नंदन से किसी भांति कम नही है। येशु को जब सूली पर चढाया गया तो वो कहते है '' हे ईश्वर इन्हें क्षमा करना ...क्योंकि ये नही जानते ये क्या कर रहे है ''...इसी तरह कृष्ण के तलवे में जब जरा व्याध का तीर चुभता है....और वो उनकी मृत्यु का कारण भी बनता है तो वो उसे स्वीकारते हुए उसे क्षमा कर देते है क्योंकि वह पूर्व जन्म का बाली होता है....जिसका रामावतार में कृष्ण ने वध किया था।


और अंत में शिशुओं की भांति निष्कपट मनन की कामना करते हुए येशु कहते हैं स्वर्ग का राज्य उन्ही को मिलेगा जिनका हृदय बच्चो की तरह निर्मल है...और ऐसे में तमिल कवि तिरुवल्लुवर का यह कथन shahaj hi याद आता है....वंशी मधुर है, वीणा मधुर है...ऐसा वही कहते हैं जिन्होंने शिशु की तोतली बोली का रस चखा हो।

Wednesday, October 29, 2008

यह दीप अकेला


अज्ञेय की यह कविता वैदिक काल के जुझारू मानव के संघर्ष की याद दिलाती है जो आत्मविशवास से भरपूर मगर प्रकृति पूजक और उसका सहचर है ....इसलिए जब भी सतत विकास की बात होगी तो छायावाद के मानवतावादी तेवर के साथ प्रकृति-मानव के निर्मल रिश्तो के समर्थक अज्ञेय का अलग ही व्यक्तित्व सामने आता है । ज्योति पर्व के मौके पर अज्ञेय की कविता "यह दीप अकेला " (कविता पर क्लीक करके बारे फॉण्ट साइज़ मेंआनंद लें )ज्यादा मौजू हो जाती है....और आतिशबाजी के शोर से ज्यादा दीपक के प्रशांत आलोक को कही बेहतर तरीके से पुष्ट करती है.